2026 में बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम के शुरुआती लक्षण

2026 में बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम के शुरुआती लक्षण – डॉ. प्रियंका जैन से जानें पहचान और बचाव

आज के समय में बच्चों की सेहत से जुड़ी समस्याएँ तेजी से बदल रही हैं। पहले जहाँ दिल की बीमारी को केवल बड़ों की समस्या माना जाता था, वहीं अब बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम के मामले भी सामने आ रहे हैं। 2026 में बढ़ती लाइफस्टाइल समस्याओं, स्क्रीन टाइम और अनियमित खानपान के कारण माता-पिता के लिए जागरूक रहना बेहद जरूरी हो गया है।

इंदौर स्थित बचपन किड्स केयर क्लिनिक की सीनियर पेडिट्रिशन डॉ. प्रियंका जैन बताती हैं कि यदि शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए, तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।


बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम के शुरुआती लक्षण - Dr. Priyanka Jain

बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम क्या है?

जब बच्चे के दिल की संरचना (structure) या कार्य (function) में कोई असामान्यता होती है, तो उसे बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम कहा जाता है। यह समस्या जन्मजात (Congenital) भी हो सकती है और जीवनशैली या संक्रमण के कारण बाद में भी विकसित हो सकती है।

भारत में सार्वजनिक जागरूकता की कमी के कारण कई बार माता-पिता शुरुआती संकेतों को सामान्य कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर स्थिति बना सकती है।


छोटे बच्चों में शुरुआती लक्षण

शिशुओं और छोटे बच्चों में बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम के संकेत अलग तरह से दिखाई देते हैं। माता-पिता को निम्न लक्षणों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:

  • मां का दूध पीते समय त्वचा और होंठों का नीला पड़ना
  • दूध पीते समय जल्दी थक जाना
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • बार-बार सीने में संक्रमण होना
  • वजन का सही तरीके से न बढ़ना

यदि बच्चा दूध पीते-पीते पसीना-पसीना हो जाए या सांस तेज चलने लगे, तो यह सामान्य नहीं है। यह बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम का शुरुआती संकेत हो सकता है।


बड़े बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम

बड़े बच्चों में दिखाई देने वाले लक्षण

स्कूल जाने वाले या किशोर बच्चों में लक्षण थोड़े अलग हो सकते हैं। जैसे:

  • सामान्य खेलकूद या सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थक जाना
  • अत्यधिक पसीना आना
  • सीने में दर्द की शिकायत
  • दिल की धड़कन तेज महसूस होना (Palpitations)
  • अच्छी डाइट के बावजूद वजन न बढ़ना
  • बार-बार और लंबे समय तक सर्दी-खांसी रहना

यदि बच्चा खेलते समय अचानक बैठ जाए और कहे कि उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो यह बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है।


2026 में बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम की जीवनशैली

किन कारणों से बढ़ रही है समस्या?

2026 में बच्चों की जीवनशैली पहले से अधिक बदल चुकी है। बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम बढ़ने के कुछ मुख्य कारण हैं:

  • अत्यधिक स्क्रीन टाइम (मोबाइल, टीवी, गेम्स)

  • जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन

  • शारीरिक गतिविधि की कमी

  • मोटापा

  • प्रदूषण और संक्रमण

भारत में शहरी क्षेत्रों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, जो भविष्य में हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है।


बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम डॉक्टर से संपर्क करें

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि आपके बच्चे में ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी बार-बार दिखाई दे, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच जैसे ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी आदि से बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम की सही पहचान की जा सकती है।

डॉ. प्रियंका जैन के अनुसार, “माता-पिता को अपने बच्चे के व्यवहार और ऊर्जा स्तर में बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए। शुरुआती जांच से भविष्य की जटिलताओं को रोका जा सकता है।”


बचाव कैसे करें?

हालांकि कुछ हृदय समस्याएं जन्मजात होती हैं, लेकिन कई मामलों में सही देखभाल से जोखिम कम किया जा सकता है।

1. संतुलित आहार दें

बच्चों को हरी सब्जियां, फल, दाल, दूध और प्रोटीन युक्त भोजन दें। जंक फूड से दूरी रखें।

2. रोजाना शारीरिक गतिविधि

कम से कम 45–60 मिनट आउटडोर खेल जरूरी है।

3. स्क्रीन टाइम सीमित करें

मोबाइल और टीवी का समय नियंत्रित रखें।

4. नियमित स्वास्थ्य जांच

यदि परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, तो बच्चे की नियमित जांच करवाना जरूरी है।

इन उपायों से बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


सार्वजनिक जागरूकता - बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम

सार्वजनिक जागरूकता क्यों जरूरी है?

भारत जैसे देश में कई माता-पिता आर्थिक या जानकारी की कमी के कारण समय पर जांच नहीं करवा पाते। स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य शिविरों में जागरूकता कार्यक्रम चलाना बेहद जरूरी है।

यदि समाज मिलकर इस विषय पर जागरूकता बढ़ाए, तो बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम के मामलों को शुरुआती चरण में ही पहचाना जा सकता है।


निष्कर्ष

दिल की सेहत केवल बड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि आपका बच्चा बार-बार थकता है, सांस फूलती है या वजन नहीं बढ़ रहा है, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें।

समय पर पहचान, सही परामर्श और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बच्चों में हार्ट प्रॉब्लम से बचाव संभव है। अपने बच्चे की सेहत को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर सीनियर पेडिट्रिशन डॉ. प्रियंका जैन से जरूर सलाह लें।

बच्चों का स्वस्थ दिल ही उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव है।

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